प. महाराष्ट्र स्तरीय संघीय संस्कार कार्यशाला आयोजित


इचलकरंजी. दिनांक:- 19.02.2012,
अ.भा.ते.यु.प. के तत्वावधान में "पश्चिम महाराष्ट्र स्तरीय संगठन कार्यशाला" का आयोजन साध्वी श्री कुन्थुश्रीजी आदि ठाणा   के पावन सानिध्य में तेयुप इचलकरंजी द्वारा किया गया. अखिल भारतीय स्तर पर संघीय संस्कार कार्यशालाओं के आयोजन में सर्वप्रथम कार्यशाला इचलकरंजी में आयोजित की गयी. राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजयजी खटेड़ की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में सेवाव्रती उपासक प्राध्यापक श्री निर्मलजी नौलखा उपस्थित थे. विशिष्ट अतिथि के रूप में अभातेयुप के संगठन मंत्री  श्री राजेश सुराना, राष्ट्रीय कार्यसमिती सदस्य श्री अरविन्द चौरडिया, केन्द्रीय संयोजक श्री मनोज संकलेचा, भारतीय रेलवे उदयपुर डिविजन के श्री सी.एल.चितला आदि विशेष रूप से उपस्थिति थे.  तीन सत्रों में विभाजित इस कार्यशाला में इचलकरंजी, जयसिंगपुर, पूना, मिराज, सोलापुर, सांगली, कोल्हापुर, तासगांव के  संभागियों ने  भाग लिया.  कार्यशाला से पूर्व तेयुप भजन मंडली द्वारा विजय गीत का संगान  एवं  श्री राजेश सुराना द्वारा श्रावक निष्ठा पत्र वाचन किया गया. 
उदघाटन सत्र :  
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजयजी खटेड़ ने कार्यशाला के बेंनर का अनावरण कर कार्यशाला के शुभारम्भ की विधिवत उद्घोषणा की. तेयुप इचलकरंजी की ओर से अध्यक्ष श्री महेंद्र छाजेड ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया.कार्यशाला के केन्द्रीय संयोजक एवं शाखा प्रभारी श्री मनोज संकलेचा ने अतिथी परिचय प्रस्तुत किया.   साध्वी वृन्द, राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अतिथियों को कार्यशाला किट भेंट किया गया.
प्रथम प्रशिक्षण सत्र: 
  • राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजयजी खटेड़ ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि- “ हमें तेरापंथ की ओजस्वी आचार्य परंपरा से जो संघीय संस्कारों कि विरासत मिली है इसका संरक्षण एवं संवर्धन करना हमारा कर्त्तव्य है. संस्कार दो प्रकार के होते है नैसर्गिक एवं अधिगमज. बिना सम्यक संस्कारो के आध्यात्मिक विकास संभव नहीं है.

  • "तेरापंथ परिचय एवं सैद्धांतिक पक्ष" विषय पर प्रशिक्षक श्री निर्मलजी नौलखा ने बताया कि – “तेरापंथ की नींव तीन आधारशिलाओ पर टिकी है – निवृत्ति, ह्रदय परिवर्तन एवं सापेक्षता. प्रवृति छोड़ निवृत्ति के द्वारा ही आत्मिक उज्ज्वलता संभव है. धर्म बलप्रयोग या आरोपित नहीं हो सकता व्यक्ति का ह्रदय परिवर्तन होकर वह धर्म अपनाये. धर्मसंघ में साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविका परस्पर सापेक्ष है. आचार्य भिक्षु कि धर्मक्रांति वैचरिक एवं आचार शिथिलता के विरुद्ध थी. जैन धर्म में कर्म बंधन कराने वाली प्रवृत्ति को पाप माना गया है. स्थूल जगत में किसी प्रवृत्ति के अच्छे या बुरे होने के अलग अलग मापदंड हो सकते है. कोई प्रवृत्ति जो स्थूल जगत में अच्छी हो लेकिन उसमे यदि कर्म बंधन हो तो वह पाप की श्रेणी में आयेंगी.
  • साध्वी श्री कुन्थुश्रीजी ने अपने पावन पाथेय में फरमाया कि हर समाज एवं हर परिवार में मर्यादा एवं अनुशाशन का होना जरूरी है. यह तभी संभव है जब भावी पीढ़ी संस्कारित होंगी. सम्यक ज्ञान के बिना संवर-निर्जरा संभव नहीं एवं इनके बिना मोक्ष संभव नहीं है. जैन तत्वज्ञान की सही समज एवं संघीय संस्कार की सम्पदा ही सच्ची सम्पदा है, भौतिक सम्पदा का कोई मूल्य नहीं है.    

  •  श्री राजेश सुराना ने श्रावक निष्ठां पत्र की धाराओ का विवेचन किया.
  •   साध्वी श्री सुमंगालाजी एवं साध्वी श्री सुलभयशाजी द्वारा गीतिका संगान किया गया.
  •   राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उनकी पूरी टीम का तेयुप इचलकरंजी द्वारा मोमेंटो भेंट कर सन्मान किया गया. इस अवसर पर इचलकरंजी शाखा परिषद् के सभी पूर्व अध्यक्षों को तेयुप द्वारा सम्मान पत्र राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजय खटेड के हाथों भेंट किये गए.  
  • अभातेयुप  द्वारा तेयुप इचलकरंजी शाखा परिषद् को कार्यशाला आयोजन हेतु राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजय खटेड एवं उनकी टीम ने मोमेंटो प्रदान कर उत्साहवर्धन किया. 

द्वितीय प्रशिक्षण सत्र:
  • “तेरापंथ एवं मूर्तिपूजा” विषय पर अपने प्रशिक्षण में श्री निर्मलजी नौलखा ने बताया कि – जैन दर्शन ‘आत्म कर्तृत्ववाद’ में विशवास रखता है. हमारी आत्मा स्वयं ही सुख दुःख की करता है. मूल उपादान तो आत्मा ही है निमित्त कोई भी हो सकता है. हम द्रव्य पूजा में विशवास नहीं रखते.

  •  साध्वी श्री सुमंगलाजी ने फ़रमाया कि हम धर्मसंघ के प्रति अपने दायित्व को समझे. संघ के प्रति पूर्ण श्रद्धा एवं समर्पण रखे. 
  • साध्वी श्री कंचनरेखाजी ने फ़रमाया कि तेरापंथ धर्मसंघ हमारे ह्रदय का हार है. तेरापंथ को हम केवल जन्मगत अथवा परम्परागत ना समझे अपितु आत्मगत करें. 
  • राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजय खटेड ने अभातेयुप की भावी महत्वाकांक्षी योजनाओ जैसे Mega Blood donation drive, आचार्य श्री तुलसी डायग्नोस्टिक सेंटर्स, युवावाहिनी गठन, भवन निर्माण, व्यसन मुक्ति अभियान आदि के बारे में बताते हुए सभी युवा साथियों से इनमे जुड़ने एवं श्रम नियोजन हेतु आह्वान किया. 
  • रा.का.सदस्य श्री अरविन्द चौरडिया ने अभातेयुप प्रकाशन योजना के बारे में जानकारी दी एवं तेरापंथ टाइम्स एवं युवादृष्टि मासिक पत्रिका के बारे में बताया.
  • कार्यशाला के समापन से पूर्व संभागियो के लिए जिज्ञासा समाधान किया गया.
कार्यक्रम का संचालन उपाध्यक्ष द्वितीय संजय वैदमेहता एवं मंत्री दिनेश छाजेड ने किया.

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