ज्ञान और आचार का योग हो : आचार्य महाश्रमण प्रवचन वीडियो २३.०४.१२


बालोतरा. २३ अप्रैल २०१२. 
तेरापंथ के ग्यारहवे आचार्य श्री महाश्रमण जी का आज नागरिक सत्कार किया गया. इस अवसर पर अपने प्रवचन में आचार्यश्री ने कहा - पढमं नाणं तओ दया , आदमी के जीवन में ज्ञान और आचार का योग होना चाहिए कोरा ज्ञान अधूरा है , ज्ञान कोरा अधूरा है, कोरा आचार है ज्ञान सम्यक नहीं है तो भी कमी है. जैन सिद्धांत बताता है कि जिसके पास सम्यक ज्ञान जिसके पास नहीं है उसके पास सम्यक आचार नहीं हो सकता  संतो का समागम ज्ञान प्राप्ति का हेतु बनता है भारतीय परंपरा में संत सत्संग का महत्व बताया गया है . जिनकी साधना शुद्ध है, अहिंसा-तप के पथ पर चलने वाले साधु संतो का दर्शन ही पाप हरने वाली एवं कल्याणकारी हो सकती है. संतो का समागम और आत्म-कल्याण की बात श्रवण करने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है. संत समागम ना उपलब्ध हो तो कम से कम सज्जनो की संगत करे. दुर्जन की संगत ना करे. संतो के पास जाने से ज्ञान प्राप्त होता है और आचरण सम्यक बनता है. 

बाड़मेर जीले में हमारा लंबा प्रवास रहेगा. हम बालोतरा आए है जहा गुरुदेव तुलसी ने मर्यादा महोत्सव किया था और गुरुदेव महाप्रज्ञ जी ने अहिंसा यात्रा की, आज हम अहिंसा यात्रा लेकर आये है. बाजार से हमारी यात्रा निकली है, में चाहता हू किसी देवी देवता की तस्वीर आप लगाए या ना लगाए लेकिन दूकान में नैतिकता की देवी बिराजे, अहिंसा पूर्ण हमारा व्यवहार हो . हम चाहते है यह प्रवास बालोतरा एवं निकटवर्ती क्षेत्रो में शान्ति फैलाने वाला  हो, वातावरण सुखमय, सौहार्दपूर्ण बने.  आचार्य ने बालोतरा के सभी समाज के लोगो का साधुवाद किया कि उन्होंने इतना सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखा है. सामुहिक रूप से जगह जगह स्वागत किया यह आपसी सौहार्द प्रेम का उदाहरण है. बालोतरा औद्योगिक नगरी है. लेकिन कुछ बातो का विशेष ध्यान रखे धन का मोह ना हो, धन का अहंकार ना हो. धन के प्रति मूर्च्छा ना रहे. धन का गलत कार्यों में उपयोग ना हो.  

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