समता की साधना है शांति का आधार : साध्वीश्री मधुस्मिताजी

तेयुप इचलकरंजी द्वारा अभिनव सामयिक का आयोजन 
इचल.१६ अगस्त. हर व्यक्ति जीवन में शान्ति और आनंद चाहता है. समता का अभ्यास करने वाला ही शान्ति पा सकता हैं. समता ही शान्ति का आधार है. समता के पौधे पर ही शान्ति और आनंद के फल लगते है. आगमों में कहा गया- लाभालाभे सुहे दुक्खे जीविए मरण तहा, समो निंदा पसंसासु अर्थात् लाभ-अलाभ, सुख-दुःख, जीवन-मरण, निंदा-प्रशंसा एवं मान-अपमान जैसे 5 द्वंदों में सम रहना चाहिए.  सामयिक हमें सम रहना सीखाती है. सामयिक संतुलन की साधना है. संतुलन के बिना बड़ी बड़ी साधनाएं व्यर्थ चली जाती है. उक्त उदगार  साध्वीश्री मधुस्मिताजी ने तेरापंथ युवक परिषद् इचलकरंजी द्वारा आयोजित अभिनव सामायिक के सामूहिक प्रयोग के अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहे. कुल 160 श्रावक-श्राविकाओं ने अभिनव सामायिक का प्रयोग किया.

इससे पूर्व तेयुप भजन मंडली द्वारा 'कर लो सामयिक साधना, मुक्ति के पथ की है आराधना...' गीत द्वारा मंगलाचरण किया गया. अभातेयुप द्वारा प्रेषित अभिनव सामायिक फोल्डर एवं स्थानीय तेयुप द्वारा मुद्रित मुखवस्त्रिका कवर तेयुप अध्यक्ष श्री संजय वैदमेहता एवं मंत्री विकास सुराणा ने साध्वीश्रीजी को भेंट किया. साध्वीश्री मल्लिप्रभाजी ने एक लोगस्स का कायोत्सर्ग एवं साध्वीश्री सहजयशाजी ने त्रिपदी वंदना करवाई. जप योग में अ सि आ उ सा का जाप, ध्यान योग में साध्वीश्री भावयशाजी द्वारा श्वास प्रेक्षा प्रयोग, स्वाध्याय योग एवं परमेष्ठी वंदना के साथ सामयिक का प्रयोग सम्पन्न किया गया. 

इस अवसर पर तेरापंथ सभा इचलकरंजी अध्यक्ष श्री जेसराज छाजेड, मंत्री श्री पुष्पराज संकलेचा, तेरापंथ सभा जयसिंगपुर अध्यक्ष श्री अशोक रुणवाल, प्रेक्षा प्रशिक्षक श्री विजयसिंह रुणवाल, तेमम इचल. अध्यक्षा सौ. सुनीता गिडिया, मंत्री सौ. जयश्री जोगड़ आदि विशेष रूप से उपस्थित थे.  स्थानीय श्रावक समाज के साथ जयसिंगपुर से भी समागत श्रावक उपस्थित थे.





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