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महाश्रमण का महास्वागत : बालोतरा को तारणे आये तारण हार

बालोतरा। तेरापंथ के ग्यारहवें अधिशास्ता आचार्य महाश्रमण ने रविवार को बालोतरा नगर में प्रवेश किया तो पूरा शहर उनके अभिनंदन को उमड़ पड़ा। लंबे समय से आतुर आस्तिकों की मानो मन की मुराद पूरी हो गई। महाश्रमण शहर में कदम कदम आगे बढ़े और हर कदम पर भावो की पुष्पवर्षा, जयकारे और श्रद्धा के साथ झुकते शीष उनके महास्वागत की तस्वीर बना रहे थे। आचार्य महाश्रमण ने यहां अपने संबोधन में सात्विक जीवन, अहिंसा के मार्ग और पुण्य के रास्ते पर चलने का कहा।

राग द्वेष वहां हिंसा
तेरापंथ भवन में आचार्य ने कहा कि हिंसा का मार्ग अधोगति की ओर ले जाता है। रागद्वेष जहां है,वहां हिंसा का आधार बनता है। अहिंसा का मार्ग हमें उर्द्धगति की ओर ले जाता है। सभी के प्रति संयम बरतें। जैन धर्म के तीर्थकरों व आचार्यो ने आमजन को अहिंसा का उपदेश दिया।सुक्ष्म से सुुक्ष्म जीव हिंसा न हो ऎसी जिंदगी जीएं। आदमी ज्ञान प्राप्त कर ज्ञानी बनता है।ज्ञान का सार यह हो कि वह कभी हिंसा नहीं करें।दुनिया में हिंसा व अहिंसा जीवित है। इंसान इंसानियत के साथ धर्ममय जीवन जीएं।

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