Skip to main content

Posts

Showing posts with the label National

Aagam Manthan Results 2013/ आगम मंथन

Aagam Manthan Pratiyogita Results Please  wait for PDF document to load.....Place mouse cursor over the document and scroll down to see next pages. To zoom in click on the floating menu '+' button. Courtesy : Jain Vishva Bharti, Ladnun Please  wait for PDF document to load.....

Teyup Vijaynagar Created World Record : 6694 Eye Checkups

ACHARYA TULSI DIAGNOSTIC CENTRE AND TYP VIJAY NAGAR ( A BRANCH OF ABTYP) CREATED A NEW WORLD RECORD WITH 6694 EYE CHECK UPS IN A SINGLE DAY AT SAME VENUE.

अहिंसा यात्रा पहुंची सांचोर, दायित्व ध्वज हस्तांतरित

Sanchor, Raj. 01.03.12 Ahimsa Yatra led by H.H. Acharya Shri Mahashraman reached Sanchor this morning. People have given a warm welcome to the yatra. आचार्य महाश्रमणजी के नेतृत्व में अहिंसा यात्रा पहुंची सांचोर, टापरा मर्यादा महोत्सव समिति ने वाव अक्षय तृतीया आयोजन समिति को किया दायित्व ध्वज हस्तांतरित

अभातेयुप अध्यक्ष संजयजी खटेड की असम प्रांतीय संगठन यात्रा

अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय श्री संजयजी खटेड ने दि.22.02.13 से 26.02.13 तक असम प्रांतीय संगठन यात्रा की. यात्रा के अंतर्गत बरपेटा रोड, बोंगाईगांव, धुबडी, गौरीपुर, बिलासीपाड़ा, गुआलपाड़ा, गुवाहाटी, खारूपेटिया, तेजपुर, जोरहाट, नागोआं आदि तेयुप शाखाओं की संगठन यात्रा की. अणुव्रत संकल्प यात्रा हेतु नागोआं में चल रहे रथ के निर्माण कार्य का भी उन्होनें जायजा लिया.

2013 तेरापंथ चातुर्मास सूचि

Terapanth Chaturmas List 2013 declared by H.H. Acharya Shri Mahashramanji at 149th Maryada Mahotsav at Tapra Rajasthan.

149 वें मर्यादा महोत्सव पर पूज्य गुरूदेव द्वारा प्रदत्त निर्देश

149 वें मर्यादा महोत्सव पर पूज्य गुरूदेव द्वारा प्रदत्त निर्देश

149 वां मर्यादा महोत्सव: द्वितीय दिवस पूज्य गुरूदेव का प्रवचन

149 वां मर्यादा महोत्सव: द्वितीय दिवस पूज्य गुरूदेव का प्रवचन: शासन कल्पतरू मुख्य बिंदु * शासन कल्पतरू के विकास के लिए जरूरी है हम नवदीक्षित साधु-साध्वी, समण-समणी के संस्कार ज्ञान आदि की अभिवृद्धि करें. * शासन कल्पतरू की सुरक्षा के लिए मर्यादाएं जरूरी. * सबसे बडी मर्यादा है एक आचार्य की आज्ञा में रहना. * साधु-साध्वी तो आज्ञानिष्ठ है ही तो श्रावक समाज भी पीछे नहीं है, पूर्ण श्रद्धानिष्ठ है.

Teyup Ichalkaranji launched Android App Beta

Terapanth Yuvak Parishad presents its first Android App. Now get all news, pravchans, audios, videos and updates from Jain Terapanth community on your Android mobile/tablet. This is beta version of the App and we are in process of making it better. Its not listed on Google Android market/ play store. But you can download this app by clickin this link - http://www.appsgeyser.com/358610?

श्रद्धा का आधार ज्ञान : आचार्य महाश्रमण 29.07.12 Pravchan Video

जसोल,२९.०७.१२. आचार्य महाश्रमण ने श्रद्धा के साथ ज्ञान का होना महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि श्रद्धा एक प्रकार की गाय है जो ज्ञान रूपी खूंटे से बंधी होने पर एक जगह रह सकती है। ज्ञान के खूंटे से नहीं बांधने पर श्रद्धा एक से दूसरे पर जा सकती है। इसलिए श्रद्धा का आधार ज्ञान है। आचार्य ने कहा कि हमारा श्रावक समाज ज्ञान की दृष्टि से गरीब नहीं है। श्रावकों को जितना अनुकूल समय मिले, स्वाध्याय करना चाहिए। उन्होंने अखिल भारतीय महिला मंडल की प्रशंसा करते हुए महासभा की ओर से संचालित ज्ञानशाला, उपासक श्रेणी को धर्मसंघ का एक सुंदर उपक्रम बताया। उन्होंने कहा कि जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय भी शिक्षा का अच्छा माध्यम है। आचार्य ने श्रावक शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि श्र का अर्थ है श्रद्धा का प्रतीक, व का अर्थ विवेक और क का अर्थ है क्रिया। श्रावक में विवेक रहना चाहिए। विवेक धर्म है।  आचार्य ने मितव्ययता की प्रेरणा देते हुए कहा कि श्रावक समाज अनावश्यक फिजूलखर्ची न करे। धार्मिक संस्थानों में भी फिजूल खर्चे को रोके। अधिवेशनों, सम्मेलनों में मितव्ययता रखें। सामान्य किट से काम चल जाता है तो इसमे...

आचार्य के दर्शन से बैट्री चार्ज: मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने आचार्य की सन्निधि में हर्षित होकर कहा कि ऐसे संत नैतिक मूल्यों के उदाहरण है। इनके सामीप्य व दर्शन से साल भर के लिए बैट्री चार्ज हो जाती है। इसलिए साल में एक बार दर्शन करने जरूर आता हूं। और आगे भी आने का मन रखता हूं। डॉ. भागवत ने नैतिक मूल्यों के विकास के संदर्भ में कहा कि चारित्र के बिना देश का विकास असंभव है। व्यक्ति को विवेकपूर्ण तरीके से अपनी क्रिया करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के विकास से ही विश्व का विकास संभव है।

RSS Chief Mohan Bhagvat shown support for Mega Blood Donation Drive

आचार्य महाश्रमण की सन्निधि में आयोजित कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने युवकों को प्रेरणा देते हुए कहा कि युवा स्वभाव, उत्साह, साहस व निर्भीकता का नाम है। राष्ट्र के निर्माण में युवाओं का ही योगदान है। युवाओं से अपेक्षा है कि वे अपनी प्रतिभा को संभाल उसको राष्ट्र निर्माण में लगाए। युवा संगठन को आत्मीयता का मजबूत आधार दें। गलत होने पर दोष को निकाले, व्यक्ति को नहीं। संगठन में सभी एक-दूसरे के हित की सोचें। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता पदभार, नाम प्रतिष्ठा प्राप्त करने की इच्छा नहीं रखे। सभी संघ में रहे और संघ के प्रमुख का इंगित मानें। अभातेयुप के अध्यक्ष श्री संजय खटेड व संगठन मंत्री राजेश सुराणा ने मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव जो अभातेयुप की ओर से किए जाने वाला एक ऐसा कार्यक्रम है जिसके तहत एक लाख ब्लड यूनिट 17 सितंबर को पूरे देश में इक_ा किया जाएगा। इस कार्यक्रम की किट भागवत को भेंट की। भागवत ने अपना हस्ताक्षर मय समर्थन जताते हुए कहा कि वे हर संभव अपना योगदान इसमें करेंगे। तेयुप प्रभारी मुनि दिनेश कुमार ने अपना प्रेर...

युवा दंपत्ति कार्यशाला में ३७० दम्पत्तियो ने की सहभागिता

बालोतरा. १३ मई २०१२.  पूज्य आचार्य महाश्रमण जी के पावन सानिध्य में तेयुप बालोतरा द्वारा आयोजित युवा दंपत्ति कार्यशाला में कुल ३७० दम्पत्तियो ने सहभागिता दर्ज कराई. मुख्य प्रशिक्षक के रूप में मुंबई से समागत श्री चिमनभाई सिंघवी ने दाम्पत्य जीवन को सफल एवं सुखमय बनाने के सूत्र उपस्थित दम्पत्तियो को बताये.   इस अवसर पर पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी ने फर माया कि - दाम्पत्य जीवन की सफलता के लिए परिवार में शांति का होना जरूरी है एवं इसके लिए शांति के लिए आग्रह हीन चिंतन, सहिष्णुता एवं सहनशीलता को विकसित करना चाहिए. हर व्यक्ति की रूचि एवं क्षमताए भिन्न होती है, इसलिए दूसरों की रूचि एवं क्षमताओं का सम्मान करना चाहिए. तभी दाम्पत्य जीवन सफल बनता है एवं ईंट-गारे के मकान को घर कहलाने की अर्हता प्राप्त होती है.    इस अवसर पर मुनि श्री दिनेशकुमारजी, मुनि श्री कुमारश्रमणजी ने भी खुशहाल पारिवारिक जीवन के सूत्रों के बारे में बाताया. तेयुप इचलकरंजी के उपाध्यक्ष संजय मेहता ने भी अपने विचार रखे. इससे पूर्व तेयुप बालोतरा द्वारा मंगलाचरण, तेयुप् अध्यक्ष ललित...

Terapanth Mahashraman Pravchan Video 03.05.12

धर्म ही सच्चा त्राण : आचार्य महाश्रमण बालोतरा. ०३.०५.१२. आचार्य महाश्रमण ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि आदमी परिवार-समाज में रहता है, अकेला व्यक्ति अकेला होता है. संघ भी एक परिवार है. प्रश्न यह उठता है की मेरा त्राण एवं शरण कौन है ? परिवार को त्राण माना जाए या नहीं ? आचार्य ने समझाया कि- परिवार त्राण हो सकता है, लेकिन अत्राण भी हो सकता है. स्व-जन भी प्रीत की बात भले कर ले लेकिन वह आपको बचाने में सदैव समर्थ हो यह निश्चित नहीं कहा जा सकता. इसलिए व्यक्ति को जिन-धर्म की शरण में जाना चाहिए जो कि मोक्ष की प्राप्ति कराने वाली है. क्यूंकि चाहे चक्रवर्ती हो या तीर्थंकर, एक बार तो मौत होगी. मोक्ष के बिना अजरता-अमरता नहीं प्राप्त होती.एवं धर्म हमें मोक्ष दिलाता है. इस मायने में धर्म ही सच्चा त्राण है.

Terapanth Acharya Mahashraman Pravchan Video 02.05.12

अनित्यता की अनुप्रेक्षा से आत्म कल्याण : आचार्य महाश्रमण प्रवचन वीडियो ०२.०५.१२ बालोतरा ०२ मई २०१२ आचार्य महाश्रमण ने अपने प्रवचन में फरमाया  कि हमारी दुनिया में अनित्यता भी विद्यमान है। पदार्थ किसी अपेक्षा से नित्य तो किसी और से अनित्य भी होता है। द्रव्य ने की दृष्टी से पदार्थ नित्य एवं पर्याय ने की दृष्टी से अनित्य होता है. शरीर भी एक पर्याय है। शरीर हमेशा नहीं रहता है, आत्मा शरीर को छोड़ देती है। नया  तेरापंथ भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य ने कहा कि जिस प्रकार आदमी पुराने वस्त्रों को छोड़कर नए वस्त्र धारण करता है। वैसे ही आत्मा एक शरीर को छोड़कर दूसरे शरीर को धारण कर लेती है। इसलिए यह शरीर अनित्य है तो जीवन भी अनित्य है। आचार्य ने शरीर को अध्रुव बताते हुए कहा कि व्यक्ति को धर्म का संचय आत्मा के कल्याण के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनित्य साधना द्वारा ऐसी साधना हो कि स्थायी नित्य आत्मा का कल्याण हो जाए। आत्मा की शाश्वत है जो ज्ञान, दर्शन युक्त है। व्यक्ति आत्म कल्याण के लिए प्रयास करें। व्यक्ति का चैत्य पुरुष आत्मा जागृत हो जाए। 

Video : Song by Daler Mehndi on Acharya Mahashraman Amrut Mahotsav

 नवमी की ये रात है....खुशियों की सौगात है.....अमृत की बरसात है.......तारो -तारो -तारो ....

आचार्य महाश्रमण अमृत महोत्सव वीडियो ३०.०४.१२.

बालोतरा. अमृत महोत्सव कार्यक्रम के आरंभ में समणी वृंद की ओर से मंगल संगान किया गया। मुनि वृंद की ओर से आचार्य की अभ्यर्थना में 'जियो-जियो वर्ष हजार' गीत की प्रस्तुति देकर वर्धापना की गई। मुनि रजनीश कुमार, साध्वी चारित्रयशा, साध्वी सुमति प्रभा ने अपने श्रद्धासिक्त भाव अभिव्यक्ति किए। फकीरा खां (उस्ताद बिस्मिलाह खां पुरस्कार से सम्मानित) ने मारवाड़ी गीतों की सुर लहरियों द्वारा आचार्य का भाव भीना अभिनंदन किया। आचार्य की अभ्यर्थना में जैन विश्व भारती के अध्यक्ष सुरेन्द्र चोरडिय़ा, प्रवास व्यवस्था समिति के संयोजक देवराज खींवसरा, अमृत महोत्सव संयोजक ख्यालीलाल तातेड़, अभातेयुप के संगठन मंत्री राजेश सुराणा, महासभा अध्यक्ष हीरालाल मालू, महासभा के चीफ ट्रस्टी कमल दुगड़ ने अपने भावों की अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम के अंत में साध्वी वृंद की ओर से नभ से उतरी अरुणाई गीत का मंगल संगान किया गया। कार्यक्रम का संचालन मुनि कुमार श्रमण ने किया। आचार्य को अर्पण की भेंटें: साध्वी वृंद की ओर से आचार्य को अमृत कलश की प्रतिकृति भेंट की गई। साध्वी चांद कुमारी की ओर से निर्मित माला, मंत्...

स्वाध्याय है सर्वोत्कृष्ट तप : आचार्य श्री महाश्रमण प्रवचन वीडियो २७.०४.१२

बालोतरा.२७.०४.१२. प्रस्तुति-संजय मेहता.(JTN) उत्तराध्ययन एवं श्रीमद भगवद गीता के तुलनात्मक अध्ययन पर आधारित आचार्य महाश्रमण जी की प्रवचन-माला की संकलित पुस्तक "संपन्न बनो" का लोकार्पण किया गया. गुरुदेव महाश्रमण जी ने फरमाया कि आचाय श्री महाप्रज्ञ जी ने २००२ में इसके लिए इंगित किया था. 'सुखी बनो' इस श्रुंखला का पहला ग्रन्थ था एवं यह 'संपन्न बनो' दूसरा ग्रन्थ है. साध्वी सुमतिप्रभा का इस ग्रन्थ के संपादन के लिए उन्होंने साधुवाद किया. गुरुदेव ने अपने प्रवचन में श्रावको को पाथेय फरमाते हुए कहा -साधक को सवाध्याय में रत रहना चाहिए. जैन तत्व में तप के बारह प्रकारों में स्वाध्याय एक है. स्वाध्याय के सामान दुसरा कोई तप् नहीं है, वही सर्वोत् कृष्ट तप बताया गया. स्वाध्याय से साधना का पथदर्शन होता है. आगम में ज्ञान को प्रकाशकर कहा गया है. स्वाध्याय की परिभाषा बताते हुए आचार्य श्री ने कहा - 'स्व+अध्याय' की संधि से स्वाध्याय शब्द बना है अर्थात स्वयं का - अपनी आत्मा का अध्याय करना स्वाध्याय है. 'सु+आ+अध्याय' अर्थात सब तरह से अध्याय करना स्वाध्याय ...

समता की साधना सामयिक : आचार्य महाश्रमण प्रवचन विडियो २४.०४.१२

बालोतरा. अभिनव सामयिक का अभ्यास करते श्रावक-श्राविका बालोतरा. २६ अप्रैल २०१२. प्रस्तुति - संजय मेहता  आचार्य  महाश्रमण अमृत महोत्सव चतुर्थ चरण आयोजन के दूसरे दिन आज अभिनव सामयिक प्रयोग किया गया. इस अवसर पर पूज्य आचार्य महाश्रमण ने अपने प्रवचन में कहा - सामयिक एक अनुष्ठान है, साधना है. समता की साधना है. सामयिक में सावद्य योग का त्याग  किया जाता है,  सावद्य शब्द 'स' + 'अवद्य'  अर्थात सह पाप या पाप सहित.  इसलिए विशेष जागरूकता रखनी चाहिए ताकि सामयिक मैं किसी भी प्रकार की सावद्य प्रवृत्ति ना हो. . दीक्षा ग्रहण करते समय साधु पूर्ण जीवन के लिए सावद्य योग का त्याग करते है जबकि श्रावक एक मुहूर्त अर्थात ४८ मिनिट के लिए सावद्य योग का त्याग कर सामयिक करते है. सामयिक ३ प्रकार की होती है - ६ कोटि, ८ कोटि एवं ९ कोटि की सामयिक. जब दो करण(करू नहीं - कराउ नहीं)-दो योग (मन - वचन - काय) ,  से सावद्य प्रवृत्ति का त्याग करते है तो ६ कोटि की सामयिक , अगर इसमें अनुमोदू  नहीं वचन से एवं अनुमोदू  नहीं मन से जोड़ ले तो ८ कोटि की सामयिक हो जाती है एवं यदि इसमें ...

राष्ट्र निर्माण में अणुव्रत की भूमिका महत्वपूर्ण : आचार्य महाश्रमण प्रवचन २५.०४.१२

बालोतरा. २५.०४.२१२.  आचार्य महाश्रमण जी के ५०वे जन्मोत्सव उपलक्ष्य आयोजित अमृत महोत्सव का चतुर्थ चरण आज से बालोतरा में आरम्भ हुआ. राष्ट्र निर्माण में अणुव्रत की भूमिका विषय पर अपने प्रवचन में आचार्य श्री ने फरमाया कि आदमी का व्यवहार धर्मयुक्त होना चाहिए. व्यवहार पवित्र तब होता है जब भाव पवित्र होता है. भाव मलिन तो व्यवहार मलिन. भावो को शुद्ध निर्मल बनाने का प्रयास हो. आज हम राष्ट्र निर्माण में अणुव्रत की भूमिका के विषय पर चर्चा कर रहे है. परम पूज्य गुरुदेव तुलसी का मानव हितकारी आंदोलन था अणुव्रत  आंदोलन. अगर अणु व्रत की अनुपालना सम्यक होती है तो राष्ट्र का सर्वांगीण विकास हो सकता है. राष्ट्र निर्माण के लिए चार तरह के विकास आवश्यक है - भौतिक विकास, आर्थिक विकास, नैतिक विकास, आध्यात्मिक विकास. भौतिक एवं आर्थिक विकास के बिना राष्ट्र सदृढ़ नहीं हो सकता. लेकिन नैतिक मूल्यों के विकास के बिना एवं आध्यात्मिक विकास के बिना सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता. यदि राष्ट्र में भ्रष्टाचार हो, काले धन की अधिकता हो, लोग व्यसन करते हो, मूल्यों-संस्कारों का ह्रास हो तो विकास किसी संभव है. नैतिक चे...

ज्ञान और आचार का योग हो : आचार्य महाश्रमण प्रवचन वीडियो २३.०४.१२

बालोतरा. २३ अप्रैल २०१२.  तेरापंथ के ग्यारहवे आचार्य श्री महाश्रमण जी का आज नागरिक सत्कार किया गया. इस अवसर पर अपने प्रवचन में आचार्यश्री ने कहा - पढमं नाणं तओ दया , आदमी के जीवन में ज्ञान और आचार का योग होना चाहिए कोरा ज्ञान अधूरा है , ज्ञान कोरा अधूरा है, कोरा आचार है ज्ञान सम्यक नहीं है तो भी कमी है. जैन सिद्धांत बताता है कि जिसके पास सम्यक ज्ञान जिसके पास नहीं है उसके पास सम्यक आचार नहीं हो सकता  संतो का समागम ज्ञान प्राप्ति का हेतु बनता है भारतीय परंपरा में संत सत्संग का महत्व बताया गया है . जिनकी साधना शुद्ध है, अहिंसा-तप के पथ पर चलने वाले साधु संतो का दर्शन ही पाप हरने वाली एवं कल्याणकारी हो सकती है. संतो का समागम और आत्म-कल्याण की बात श्रवण करने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है. संत समागम ना उपलब्ध हो तो कम से कम सज्जनो की संगत करे. दुर्जन की संगत ना करे. संतो के पास जाने से ज्ञान प्राप्त होता है और आचरण सम्यक बनता है.  बाड़मेर जीले में हमारा लंबा प्रवास रहेगा. हम बालोतरा आए है जहा गुरुदेव तुलसी ने मर्यादा महोत्सव किया थ...