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149 वां मर्यादा महोत्सव: द्वितीय दिवस पूज्य गुरूदेव का प्रवचन

149 वां मर्यादा महोत्सव: द्वितीय दिवस पूज्य गुरूदेव का प्रवचन: शासन कल्पतरू मुख्य बिंदु * शासन कल्पतरू के विकास के लिए जरूरी है हम नवदीक्षित साधु-साध्वी, समण-समणी के संस्कार ज्ञान आदि की अभिवृद्धि करें. * शासन कल्पतरू की सुरक्षा के लिए मर्यादाएं जरूरी. * सबसे बडी मर्यादा है एक आचार्य की आज्ञा में रहना. * साधु-साध्वी तो आज्ञानिष्ठ है ही तो श्रावक समाज भी पीछे नहीं है, पूर्ण श्रद्धानिष्ठ है.

Aacharya Mahashraman Pravchan Video 11.05.12

संवर है मोक्ष का मार्ग : आचार्य महाश्रमण बालोतरा.११.०५.२०१२.

Aacharya Mahashraman Pravchan Video 10.05.12

आश्रव भव का हेतु  : आचार्य महाश्रमण. जैन तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण ने आश्रव को संसार का कारण बताते हुए कहा कि आश्रव भव का हेतु है, जन्म-मरण का कारण है। प्राणी एक जन्म से दूसरे जन्म में जाता है इस क्रम का आधार आश्रव है। बिना आश्रव के जन्म-मरण की परम्परा नहीं चल सकती। आचार्य गुरुवार को नया तेरापंथ भवन में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। आचार्य ने आश्रव को परिभाषित करते हुए कहा कि कर्मों को उत्कृष्ट करने में हेतु भूत आत्म परिणाम आश्रव है। कर्मों के आने का मार्ग आश्रव है। आश्रवों के द्वारा कर्म आता है तो आत्मा रूपी तडाग भर जाता है। आचार्य ने कहा कि मिथ्यात आश्रव बहुत बड़ा आश्रव है। अणुव्रत भी आश्रव है। कषाय से बंध होता है। आचार्य ने प्रेरणा देते हुए कहा कि आश्रव में शुभयोग का भी बंध होता है, पर व्यक्ति का लक्ष्य निर्जरा का रहे। आचार्य ने धर्माधारजे मुझे तारों गीत गया तो पूरी परिषद गुरुदेव के प्रति श्रद्धानत हो गई। मंत्री मुनि सुमेरमल ने कहा कि जो जागता है वह स्वयं को साधता है। व्यक्ति का लक्ष्य बहुत ऊंचा होना चाहिए। उसकी मंजिल बहुत मनभावनी है, वहां पहुंचने के ...

नव-प्रभात के प्रथम दर्शन : बालोतरा से प्रतिदिन की प्रस्तुति

Start your day with auspicious darshan of H.H. ACHARYA MAHASHRAMAN. Daily first photo updates direct from Balotra Rajasthan !

Terapanth Acharya Mahashraman Pravchan Video 02.05.12

अनित्यता की अनुप्रेक्षा से आत्म कल्याण : आचार्य महाश्रमण प्रवचन वीडियो ०२.०५.१२ बालोतरा ०२ मई २०१२ आचार्य महाश्रमण ने अपने प्रवचन में फरमाया  कि हमारी दुनिया में अनित्यता भी विद्यमान है। पदार्थ किसी अपेक्षा से नित्य तो किसी और से अनित्य भी होता है। द्रव्य ने की दृष्टी से पदार्थ नित्य एवं पर्याय ने की दृष्टी से अनित्य होता है. शरीर भी एक पर्याय है। शरीर हमेशा नहीं रहता है, आत्मा शरीर को छोड़ देती है। नया  तेरापंथ भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य ने कहा कि जिस प्रकार आदमी पुराने वस्त्रों को छोड़कर नए वस्त्र धारण करता है। वैसे ही आत्मा एक शरीर को छोड़कर दूसरे शरीर को धारण कर लेती है। इसलिए यह शरीर अनित्य है तो जीवन भी अनित्य है। आचार्य ने शरीर को अध्रुव बताते हुए कहा कि व्यक्ति को धर्म का संचय आत्मा के कल्याण के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनित्य साधना द्वारा ऐसी साधना हो कि स्थायी नित्य आत्मा का कल्याण हो जाए। आत्मा की शाश्वत है जो ज्ञान, दर्शन युक्त है। व्यक्ति आत्म कल्याण के लिए प्रयास करें। व्यक्ति का चैत्य पुरुष आत्मा जागृत हो जाए। 

आचार्य महाश्रमण अमृत महोत्सव वीडियो ३०.०४.१२.

बालोतरा. अमृत महोत्सव कार्यक्रम के आरंभ में समणी वृंद की ओर से मंगल संगान किया गया। मुनि वृंद की ओर से आचार्य की अभ्यर्थना में 'जियो-जियो वर्ष हजार' गीत की प्रस्तुति देकर वर्धापना की गई। मुनि रजनीश कुमार, साध्वी चारित्रयशा, साध्वी सुमति प्रभा ने अपने श्रद्धासिक्त भाव अभिव्यक्ति किए। फकीरा खां (उस्ताद बिस्मिलाह खां पुरस्कार से सम्मानित) ने मारवाड़ी गीतों की सुर लहरियों द्वारा आचार्य का भाव भीना अभिनंदन किया। आचार्य की अभ्यर्थना में जैन विश्व भारती के अध्यक्ष सुरेन्द्र चोरडिय़ा, प्रवास व्यवस्था समिति के संयोजक देवराज खींवसरा, अमृत महोत्सव संयोजक ख्यालीलाल तातेड़, अभातेयुप के संगठन मंत्री राजेश सुराणा, महासभा अध्यक्ष हीरालाल मालू, महासभा के चीफ ट्रस्टी कमल दुगड़ ने अपने भावों की अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम के अंत में साध्वी वृंद की ओर से नभ से उतरी अरुणाई गीत का मंगल संगान किया गया। कार्यक्रम का संचालन मुनि कुमार श्रमण ने किया। आचार्य को अर्पण की भेंटें: साध्वी वृंद की ओर से आचार्य को अमृत कलश की प्रतिकृति भेंट की गई। साध्वी चांद कुमारी की ओर से निर्मित माला, मंत्...

महाश्रमण का महास्वागत : बालोतरा को तारणे आये तारण हार

बालोतरा। तेरापंथ के ग्यारहवें अधिशास्ता आचार्य महाश्रमण ने रविवार को बालोतरा नगर में प्रवेश किया तो पूरा शहर उनके अभिनंदन को उमड़ पड़ा। लंबे समय से आतुर आस्तिकों की मानो मन की मुराद पूरी हो गई। महाश्रमण शहर में कदम कदम आगे बढ़े और हर कदम पर भावो की पुष्पवर्षा, जयकारे और श्रद्धा के साथ झुकते शीष उनके महास्वागत की तस्वीर बना रहे थे। आचार्य महाश्रमण ने यहां अपने संबोधन में सात्विक जीवन, अहिंसा के मार्ग और पुण्य के रास्ते पर चलने का कहा। राग द्वेष वहां हिंसा तेरापंथ भवन में आचार्य ने कहा कि हिंसा का मार्ग अधोगति की ओर ले जाता है। रागद्वेष जहां है,वहां हिंसा का आधार बनता है। अहिंसा का मार्ग हमें उर्द्धगति की ओर ले जाता है। सभी के प्रति संयम बरतें। जैन धर्म के तीर्थकरों व आचार्यो ने आमजन को अहिंसा का उपदेश दिया।सुक्ष्म से सुुक्ष्म जीव हिंसा न हो ऎसी जिंदगी जीएं। आदमी ज्ञान प्राप्त कर ज्ञानी बनता है।ज्ञान का सार यह हो कि वह कभी हिंसा नहीं करें।दुनिया में हिंसा व अहिंसा जीवित है। इंसान इंसानियत के साथ धर्ममय जीवन जीएं।

आचार्य महाश्रमण अहिंसा यात्रा बालोतरा में प्रवेश तस्वीरे

Courtesy : Roshan Jain, Naresh Chhajer ,BALOTRA

MahashramanJi Photos : Mahavir Jayanti at Pali

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