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ज्ञानशाला दिवस का इचलकरंजी में हुआ आयोजन


ज्ञानशाला बगिया, ज्ञानार्थी फुल एवं प्रशिक्षक है मालाकार 

– साध्वी श्री मधुस्मिताजी

केन्द्रीय ज्ञानशाला प्रकोष्ठ निर्देशित ज्ञानशाला दिवस का इचलकरंजी ज्ञानशाला द्वारा हुआ आयोजन

इचलकरंजी. ३० अगस्त. फुलों को यदि मालाकार न मिले तो वह गिरकर पैरों में कुचले जाते है किन्तु यदि उन्हें मालाकार मिल जाए तो वही फुल हार बनकर श्रृंगार बनते है. ठीक इसी तरह बच्चे भी फुल है. प्रशिक्षक रूपी मालाकार इन्हें संस्कारित बनाते है और यही संस्कारित बच्चे भविष्य के समाज का श्रृंगार बनते है. सम्यक् संस्कारों के अभाव में बच्चों का सर्वांगीण निर्माण नहीं होता और हम स्वस्थ भावी पीढी की कल्पना नहीं कर सकते. उक्त उदगार साध्वीश्री मधुस्मिता जी ने ज्ञानशाला की इचलकरंजी इकाई द्वारा आयोजित 'ज्ञानशाला दिवस’ के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए.

साध्वीश्रीजी ने ज्ञानार्थी बच्चों को प्रेरणा देते हुए कहा कि- हर बालक को अपने जीवन में ३ गुणों को अवश्य अपनाना चाहिए- अनुशासन, विनम्रता एवं आलस्य निवृत्ति. साध्वीश्रीजी ने “करना भावी पीढी का नवनिर्माण है” गीतिका का संगान भी किया.

इससे पूर्व प्रात: 8 बजे ज्ञानार्थियों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गयी. जिसमे कुल 70 ज्ञानार्थी बच्चे सम्मिलित हुए. नन्हे नन्हे हाथों में जैन ध्वज, ज्ञानशाला का शुभ्र श्वेत गणवेश परिधान, उद्घोषो की तख्तियों के साथ जब पंक्तिबाद्ध रैली ने इचलकरंजी नगर की गलियों को “घर-घर जागे सद्संस्कार , ज्ञानशाला का यह उपहार” सहित संस्कार प्रभावक उद्घोषों से गुंजायमान कर दिया. नगरजन इस रेली को देखकर विस्मित और मंत्रमुग्ध हो गए. प्रभात फेरी तेरापंथ पहुँचकर समारोह में परिवर्तित हो गयी.

इस अवसर पर इचलकरंजी ज्ञानशाला संयोजक सिद्दार्थ चौपडा, तेरापंथ सभा इचल. अध्यक्ष जेसराज छाजेड, मंत्री पुष्पराज संकलेचा, तेयुप अध्यक्ष संजय वैदमेहता, मंत्री विकास सुराणा, तेमम इचल अध्यक्षा सुनीता गिडिया, मंत्री जयश्री जोगड़ सहित ज्ञानशाला के प्रशिक्षक-प्रशिक्षिकाएं एवं ज्ञानार्थियों के अभिभावक उपस्थित थे.


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